आपदा प्रबंधन योजना

सारांश

आपदा प्रबन्धन संस्थान, भोपाल द्वारा यूनिसेफ तथा मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से, मध्यप्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों के लिए जिला आपदा प्रबन्धन योजना, एवं उन जिलों में आपदा के प्रति अति संवेदनशील 25 ग्रामों में, ग्राम आपदा प्रबन्धन योजना तैयार करने हेतु एक परियोजना संचालित की गयी। चयनित जिलों में से एक जिला धार है।

जिला धार में आपदा प्रबन्धन कार्य योजना का निर्माण सामुदायिक सहभागिता के आधार पर किया गया है। योजना का निर्माण जिले के प्रमुख अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा जिला स्तर पर कार्यरत अन्य क्रियाशील संगठनों के अभिमुखीकरण तथा जिला स्तर पर आयोजित किये गये जिला परामर्श (कन्सलटेशन) कार्यशालाओं के माध्यम से योजना तैयार किया गया है।
इस जिला आपदा प्रबन्धन कार्य योजना में जिला धार से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रशासनिक जानकारियों को प्रथम अध्याय में सम्मिलित किया गया है। इसके अन्तर्गत जिले के भौगोलिक संरचना, उपलब्ध संसाधनों, सेवाओं ग्राम सभाओं तथा जिले के आधारभूत आंकड़ों को सम्मिलित किया गया है।

द्वितीय अध्याय में जिले की सम्भावित खतरों तथा उन खतरों से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों, व्यक्तियों/परिवारों एवं सम्भावित खतरों से निपटने के लिए जिले में उपलब्ध संसाधनों को सूचीबद्ध किया गया है। जिला स्तर पर कार्यरत विभिन्न सरकारी विभागों स्वयं सेवी संगठनों तथा अन्य उत्तरदायित्व धारकों के साथ बैठक, संपर्क, परामर्श, समूह कार्य इत्यादि महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को शामिल करते हुए जिला धार के संभावित खतरों, संवेदनशील क्षेत्रों तथा गॉंवों का चिन्हींकरण किया गया है।

तृतीय अध्याय में विभिन्न चिन्हित खतरों का सामना करने हेतु जिले में उपलब्ध व्यवस्था के विषय में विस्तृत विवरण उल्लेखित किया गया है। विभिन्न चिन्हित खतरों के दौरान जिला स्तर पर आपदा प्रबंध कानून 2005 के अनुरूप गठित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किये जाने वाले विभिन्न कार्यां को सूचीबद्ध एवं उल्लेखित किया गया है।

चतर्थ अध्याय में जिले में चिन्हित खतरों का प्रभावी रूप से सामना करने हेतु विभिन्न स्तरों पर की जाने वाली पूर्व तैयारी के विषय में विस्तृत विवरण अंकित किया गया है। इसके अन्तर्गत आपदा संभावित क्षेत्रों मे की जाने वाली तैयारी आापदा के दौरान किये जाने वाले कार्य इत्यादि को विस्तृत रूप सें सम्मिलित किया गया है।

पंचम अध्याय में चिन्हित विभिन्न खतरों के शमन योजना के विषय में विस्तृत विवरण उल्लेखित किया गया हैं। किसी भी आपदा के समय जिला स्तर पर कार्यरत विभिन्न विभागों द्वारा सामूहिक रूप से आपदा प्रबन्धन का कार्य किया जाता है। (संरचनात्मक एवं गैरसंरचनात्मक)

षष्टम अध्याय इस कार्य योजना के षष्टम अध्याय में विस्तृत रूप से उल्लेखित किया गया है कि आपदाओं की अनुक्रिया में कौन-कौन से कार्य किये जायेंगे तथा उन कार्यों के सुचारु रूप से संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु कौन-कौन से विभाग किन-किन गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन करेंगे। तहसील तथा जिला स्तर पर कितने प्रकार की दल गठित किये जायेंगे विभिन्न दलों का नोडल अधिकारी कौन होगा तथा किसी भी आपदा के समय नोडल अधिकारी द्वारा किये जाने वाले कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है। इस अध्याय में जिला स्तर पर कार्यरत प्रमुख विभागों द्वारा किये जाने वाले कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है।

सप्तम अध्याय में आपदा के उपरान्त किये जाने वाली गतिविधियों के विषय में उल्लेखित किया गया है। पुनः प्राप्ति अर्थात ‘‘सामान्य स्थिति की बहाली’’ हेतु किये जाने वाली गतिविधियों के विषय में विस्तृत रूप से उल्लेखित किया गया है। (Integration of mitigation in re-habitation)

अष्ठम अध्याय कार्य योजना के अन्तिम अध्याय में मीडिया प्रबन्धन तथा किसी भी आपदा के समय सर्वाधिक प्रभावित होने वाले विषिष्ट समूहों जैसे महिला, बच्चे, बूढ़े, निःशक्तजन, बीमार इत्यादि के विषय में विस्तृत रूप से चर्चा की गयी है। साथ ही साथ विभिन्न खतरों/आपदाओं के समय विभिन्न स्तर जैसे पूर्व तैयारी अनुक्रिया, शमन में मीडिया का प्रभावी रूप से उपयोग कैसे किया जा सकता है? इस विषय में विस्तृत विवरण उल्लेखित किया गया है।

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